कन्नौज:-

आए दिन बेटियों के साथ समाज में हो रहे निंदनीय घटनाओं से संपूर्ण समाज हतप्रभ और व्यथित है । दैवीय प्रवृत्ति का ह्रास और आसुरी प्रवृत्ति का पनपना चिंता का विषय हो गया है । जवाहर नवोदय विद्यालय अनौगी (कन्नौज) में शिक्षक पद पर कार्यरत कवि हृदय डॉ० संतोष कुमार सिंह ‘सजल’ ने ऐसे जघन्य अपराधों के संदर्भ में समाज से अपने कविता के माध्यम से मर्मस्पर्शी ,भावुक एवं सशक्त सकारात्मक आह्वान किया है । डॉ० सिंह ने कविता के अतिरिक्त अपने संबोधन में कहा कि हमें अपने घर परिवार में बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाये । सही और गलत पथ की पहचान और नैतिक पथ पर चलने के लिए सशक्त विचार उनके मन मस्तिष्क में स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह एक लंबी प्रक्रिया है, यदि हम आज से इस पावन कार्य में लग जाएंगे तभी आने वाले दिनों में हमारी बहू-बेटियाँ सुरक्षित रह सकेंगी। एक जागरूक पिता, पुत्र, बेटा, भाई और नागरिक बने, देश और समाज को बचाएं।

    अब मंथन करना होगा

चले कहाँ से कहाँ आ गए यह चिंतन करना होगा ।
समय आ गया हमको फिर से, अब मंथन करना होगा ।।

तम की रजनी कब बीतेगी रात पूर्णिमा कब होगी ।
तम से पिंड छुड़ाना है तो रवि  पूजन करना होगा ।।

काली बन कर चले निर्भया तब निर्भय चल पायेगी।
उसे स्वयं ही महिसासुर का अब मर्दन करना होगा।।

अपराधी बस अपराधी है छोड़ो जाति-धर्म बंधन ।
निज संकीर्ण मानसिकता का परिशोधन करना होगा।।

मनुज रूप में दिखे भेड़िया पूछो नहीं जाति उसकी।
उसका बध करने वाले का, अभिनंदन करना होगा ।।

बेटी कब तक छली जाएगी कब तक रुदन करेगी वह।
व्यभिचारी को चौराहे पर अब , क्रंदन करना होगा ।।